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बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने केंद्र सरकार के आतंकवाद विरोधी अभियान का जोरदार समर्थन किया है और पश्चिम बंगाल सरकार की विभिन्न मुद्दों पर तीखी आलोचना की
बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने केंद्र सरकार के आतंकवाद विरोधी अभियान का जोरदार समर्थन किया है और पश्चिम बंगाल सरकार की विभिन्न मुद्दों पर तीखी आलोचना की है, जिनमें महंगाई भत्ता (DA) का मामला, शिक्षकों का आंदोलन, और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आंतरिक फेरबदल शामिल हैं।
आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बोलते हुए घोष ने कहा, “मोदी पहले ही कह चुके थे कि हम उन्हें उनके घर में घुसकर मारेंगे। अब तो सेना कह रही है कि बाथरूम में भी मारेंगे, क्योंकि आतंकी वहीं छिपे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह भारत का वर्तमान मूड है। जो लोग पहले आलोचना करते थे, उन्होंने ऐसी कार्रवाई की कल्पना नहीं की थी। पाकिस्तान की बोलती बंद हो गई है। उनके समर्थकों और युद्ध से मुनाफा कमाने वालों की भी बोलती बंद है।”
डीए मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लेकर घोष ने कहा कि कोर्ट ने राज्य सरकार को अगस्त में अगली सुनवाई से पहले 25% बकाया डीए भुगतान करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कोर्ट ने यही कहा था। लेकिन सरकार ने पालन नहीं किया, कहती है फंड नहीं है।” उन्होंने राज्य की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा, “एक ऐसी सरकार जो अपने बच्चों का ही भरण-पोषण नहीं कर सकती, उसे सत्ता में रहने का हक नहीं है। जब फैसला इनके पक्ष में आता है तो मान लेते हैं, वरना नकार देते हैं।”
विकास भवन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज पर घोष ने सवाल किया, “शिक्षकों को क्यों मारा गया? जब वे शांति से प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन्हें लात-घूंसों से क्यों पीटा गया?” उन्होंने कहा, “क्या यह वही समय है जब किसी के पाँव छूने की बजाय लात मारी जा रही है?” उन्होंने राज्य सरकार की दलीलों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार कोर्ट में जाकर कहे कि 18,000 उम्मीदवार पात्र हैं और उन्हें नौकरी देना चाहती है।
टीएमसी नेता सब्यसाची दत्ता और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बहस पर घोष ने कहा, “मुझे सारी जानकारी नहीं है, लेकिन उनके हावभाव बहुत कुछ कह रहे थे। पत्रकारों से बात करते समय उनकी भाषा भी गौरतलब थी। वे पार्षद हैं, तो क्या कुछ भी कह सकते हैं या कर सकते हैं? प्रदर्शनकारियों की भी भावना है। उन्हें उकसाने की क्या ज़रूरत थी? यह विवाद अनावश्यक है और सिर्फ चर्चा में बने रहने की कोशिश लगती है।”
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी में हो रहे संगठनात्मक फेरबदल, खासकर बीरभूम जिलाध्यक्ष पद से अनुब्रत मंडल को हटाए जाने पर घोष ने कहा, “हमें पता है कि अब वो अध्यक्ष नहीं हैं। ममता कभी-कभी कहती हैं कि वो खुद संभालेंगी। लेकिन जब वह खुद संभालती हैं तो उसके नतीजे भी सामने हैं।”